मंत्री जी! ऋषिकेश को गो अनुसंधान केंद्र के बदले क्या मिला

मंत्री जी! ऋषिकेश को गो अनुसंधान केंद्र के बदले क्या मिला

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ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के लिए स्वीकृत गो अनुसंधान केंद्र की फाइल भले ही सरकार ने बंद कर दी हो। मगर, सवाल अभी है कि इसके बदले ऋषिकेश को क्या मिला।

बात वर्ष 2007-8 की है। तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी तब के पशु पालन मंत्री एवं आज के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पशुलोक क्षेत्र में चार करोड़ की लागत से बनने वाले गो अनुसंधान केंद्र का शिलान्यास किया।

दोनों माननीयों ने अपने संबोधन में कहा कि गो अनुसंधान केंद्र जल्द बनकर तैयार होगा। लोग खुश थे कि एम्स से उजड़ा पशुलोक फिर से आकार लेगा। मगर, कुछ ही दिनों में खबर आई कि सरकार इसे पीपीपी मोड में बनाना चाहती है।

पीपीपी मोड की फाइल बनते ही गो अनुसंधान केंद्र का मामला लटकने की सूरत बनने लगी। दरअसल, जो संस्थाएं आगे आई उनमें से अधिकांश सरकार के मानकों को पूरा ही नहीं कर रही थी। इस तरह से मामला लटक गया।

गो अनुसंधान केंद्र को लटकाने की पटकथा भाजपा शासन में लिखी गई और 2012 में कांग्रेस के सत्ता में आते ही इस फाइल को बंद कर दिया गया। सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा किसके इशारे पर हुआ। गो अनुसंधान केंद्र न बने इसमें किसका इंट्रेस्ट था।

तब बताया गया कि इसके बदले ऋषिकेश को कोई दूसरा प्रोजेक्ट दिया जाएगा। इसका इंतजार लोगों का आज भी है। दरअसल, ऋषिकेश की कमजोर पैरवी की वजह से भी इस मामले ने कभी तूल नहीं पकड़ा। मीडिया जरूर इसमें अपनी जिम्मेदार निभाता रहा।

गत दिनों प्रदेश की पशु पालन मंत्री रेखा आर्य ऋषिकेश में थी। मीडिया के इस पर सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि ये पुराना मामला है। दिखाया जाएगा कि किन परिस्थतियों में ऐसा निर्णय लिया गया है।

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