प्रकृति की सत्ता को स्वीकारना होगाः डा. मधु थपलियाल

प्रकृति की सत्ता को स्वीकारना होगाः डा. मधु थपलियाल

- in देहरादून
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देहरादून। जलवायु परिवर्तन से तेजी से छीज रही आदर्श पर्यावरणीय स्थिति को संभालने के लिए जरूरी है कि प्रकृति की सत्ता को स्वीकारें। प्रकृति की व्यवस्था के मुताबिक स्वयं को ढालें।

ये कहना है डा. मधु थपलियाल का। डा. थपलियाल बुधवार को ग्राफ़िक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के लाइफ साइंस तथा जैव प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थी।

डा. थपलियाल ने बताया कि पूरा विश्व प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण में लगा है। तमाम तरह के विश्व स्तरीय कांफ्रेंस, सम्मिट, किये जाते रहे हैं। वजह अब सब जानने और समझने लगे हैं कि प्रकृति के संरक्षण के बिना मानव का अस्तिव समाप्त है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अलर्मिंग स्थिति आ चुकी है। आदर्श पर्यावरणीय स्थिति को रिस्टोर करने के लिए प्रयास करने होंगे। इसके मुताबिक नीतियों का निर्धारण करना होगा। नीतियां प्रकृति की व्यवस्थाओं के मुताबिक होनी चाहिए।

डा. मधु थपलियाल ने कहा कि हमें शहरों के बड़े नालों में, तालाबों में बड़ी-बड़ी इमारते ना बना कर उनमे वृक्षारोपण करना चहिये। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार ने कहा कि यूनिवर्सिटी हमेशा समाज हित के कार्यों में अग्रणीय भूमिका निभाता है।

प्रो. निशांत राय ने मुख्य वक्ता एवं यूनिवर्सिटी के सभी पदाधिकारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का संचालन डा० जिगीषा आनन्द द्वारा किया गया।

प्रकृति संरक्षण दिवस पर छात्र छात्राओं हेतु क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में लगभग 240 प्रतिभागी जुड़े।

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