उत्तराखंड में डबल इंजन की व्यवस्था

उत्तराखंड में डबल इंजन की व्यवस्था

                                
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                                            सुदीप पंचभैया

उत्तराखंड में डबल इंजन की व्यवस्था ने काम करना शुरू कर दिया है। राज्य पहली बार ऐसे इंजन के सहारे दौड़ेगा जिसमें चेन पुलिंग की सभावना नहीं होगी। अब समय और परिणाम पायलट के जिम्मे होगा।

विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को गडढे में गिरा राज्य बताया था। इसको लेकर भाजपा ने प्रदेश की हरीश रावत को जमकर कोसा था। लोगों से इसे उखाड़ फेंकने का आहवान किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को को कुव्यवस्था के गडढे से बाहर निकालकर विकास की पटरी पर सरपट दौड़ाने के लिए डबल इंजन की जरूरत बताई थी। कहा था कि केंद्र सरकार एक इंजन बनने को तैयार है। दूसरा इंजन प्रदेश सरकार होगी।
प्रदेश के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात पर अमल किया और भाजपा को बंपर विजयी दिलाई। पार्टी को तीन चौथाई से अधिक यानि 70 में 57 सीटें हासिल हुई।

इस तरह से कहा जा सकता है कि राज्य की बेहतरी के लिए डबल इंजन मिल गया है। अब उम्मीद है कि डबल इंजन की ताकत से विकास की पटरी पर राज्य तेजी से दौड़ेगी। बहरहाल, मुख्यमंत्री की शपथ के साथ ही प्रदेश में डबल इंजन व्यवस्था ने काम करना शुरू कर दिया है।

राज्य पहली बार ऐसे इंजन के सहारे दौड़ेगा जिसमें चेन पुलिंग की संभावना ना के बराबर है। अभी तक प्रदेश की तीन सरकारें और आठ मुख्यमंत्री कुर्सी की खिंचतान की वजह से ढंग से काम नहीं कर सकें।

अब डबल इंजन से विकास की पटरी पर राज्य सरपट दौड़ेगा। इस दौड़ की परीक्षा 2019 के आम चुनाव में होगी। उम्मीद की जा सकती है कि पायलट समय और परिणाम पर गौर करेंगे। इस पर लोगों की नजर होगी। डबल इंजन की वजह से लोगों की उम्मीदें भी अधिक होंगी।

लोग देखेंगे कि केंद्र का इंजन राज्य की बेहतरी में कितना जोर लगाता है। केंद्र का इंजन राज्य के इंजन की क्षमताओं का कैसे बढ़ाता है। विजन डॉक्यूमेंट में दिखाए गए सपनों को आकार देते हुए भी लोग देखना चाहेंगे।

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