पर्वतीय क्षेत्रों को है चिकित्सकों को इंतजार

पर्वतीय क्षेत्रों को है चिकित्सकों को इंतजार

doctorराज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों का इंतजार है। सरकार इस इंतजार को जल्द समाप्त करने का दावा कर रही है।

उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद अस्तित्व में आए उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की सबसे अधिक दुर्दशा चिकित्सा स्वास्थ्य के मोर्चे पर हुई। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की छोड़िए जिला अस्पताल और बेस अस्पताल चिकित्सकों की कमी से दो चार हो रहे हैं।

चिकित्सकों के अधिकांश पद खाली हैं। चिकित्सक नहीं हैं तो सुविधाएं भी नदारद हैं। दवाईयों का अभाव है। परिणाम चिकित्सा स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव पलायन की बड़ी वजह बन गई है। प्रचंड बहुमत वाली सरकार दावा कर रही है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में भेजा जाएगा।

इसके लिए मैदानी क्षेत्रों में जमें करीब 100 चिकित्सकों के तबादले की तैयारी है। दावा किया जा रहा है कि जल्द ही उक्त चिकित्सकों के लिए फरमाने जारी हो जाएंगे। हालांकि इस तरह की तैयारी और फरमान पूर्ववर्ती सरकार में भी खूब हो चुके हैं। मगर, पर्वतीय क्षेत्रों को चिकित्सक नहीं मिले।

हर सरकार इस मामले में हथियार डालती रही है। झेंप मिटाने के लिए हॉस्पिटल को पीपीपी मोड में देने का शिगुफा भी छोड़ा जाता रहा है। बहरहाल, ऐसे में देखने वाली बात होगी कि प्रचंड बहुमत वाली सरकार चिकित्सकों को पहाड़ चढ़ा पाती है या नहीं।

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