गडूल के ग्राम प्रधान के जाति प्रमाण पत्र का मामला गरमाया

गडूल के ग्राम प्रधान के जाति प्रमाण पत्र का मामला गरमाया

- in ऋषिकेश
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ऋषिकेश। गडूल के ग्राम प्रधान की जाति प्रमाण पत्र का मामला गरमा गया है। प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में हो रहे विलंब को लेकर ग्रामीण प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

गडूल के मौजूदा ग्राम प्रधान की जाति 16 साल में बदल गई। 2002 में प्रशासन ने उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया। 2018 में वो ओबीसी हो गए। ओबीसी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ा और प्रधान बन गए।

इस पर सवाल खड़े हुए। जिलाधिकारी से शिकायत हुई। जिलाधिकारी ने मामले को जांच के लिए ऋषिकेश तहसील भेजा। आरोप है कि तहसील में जांच दब गई। एक माह से जांच पूरी न होने से नाराज गडूल के ग्रामीण गुरूवार को तहसील में आ धमके।

ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और जल्द जांच रिपोर्ट देने की मांग की। इस मौके पर ग्रामीणों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। साथ ही गंभीर आरोप भी लगाए। कहा कि 2002 में प्रशासन ने मौजूदा ग्राम प्रधान को ं अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया। 2018 में उन्हें ओबीसी प्रमाण पत्र दे दिया।

ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि प्रशासन ने इस मामले में गंलत काम करने वालों को बचाया तो आंदोलन किया जाएगा। बहरहाल, प्रधान के दो-दो जाति प्रमाण पत्र की बात सामने आने पर क्षेत्र भर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस मामले को लेकर जितने मुंह उतनी बातें भी हो रही हैं।
दो-दो जाति प्रमाण पत्र बनने को लेकर भी कई बातें सामने आ रही हैं। प्रशासन ने गंभीरता से जांच कराई तो बात दूर तक पहुंच सकती है।

इस मौके पर स्वीटी रावत, धर्मेंद्र रावत, रविंद्र रावत, मंजीत रावत, नरेंद्र रावत, संदीप पुंडीर, कुंवर सिंह रावत, मनोज रावत, प्रेम रावत, गजेंद्र रावत, रितेश रावत, लेखराज रावत, दिनेश रावत, दीवान सिंह आदि मौजूद थे। 

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