शिक्षक आपस में उलझते रहे और सरकारें मनमानी करती रही

शिक्षक आपस में उलझते रहे और सरकारें मनमानी करती रही

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पौड़ी। कार्मिकों की संख्या के लिहाज से राज्य के सबसे बड़े शिक्षा विभाग में इतने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विवाद हैं कि इन्हें सुलझाने के लिए स्वतंत्र आयोग जैसी व्यवस्था की दरकार महसूस होने लगी है।

शिक्षा विभाग के अधिकांश विवादों की जड़ शिक्षकों की नियुक्ति के स्रोत का एक न होना है। ये विवाद स्कूल से लेकर निदेशालय तक में देखे जा सकते हैं। इसका असर राज्य के पूरें गवर्नमेंट स्कूल एजुकेशन सिस्टम में देखा जा सकता है।

शिक्षक की नियुक्ति से शुरू हुआ विवाद वरिष्ठता, प्रमोशन आदि सभी में दिखता है। अब इन विवादों की जड़ शिक्षा विभाग में खासी मजबूत हो गई हैं। शिक्षा विभाग शिक्षा की बेहतरी के बजाए उक्त विवादों में उलझा दिखता है। जाहिर है इसका खामियाजा राज्य के नौनिहालों को भुगतना पड़ता है।

ऐसे विवादों में अक्सर शिक्षकों के आपस में उलझने से सरकारों को मनमानी का मौका मिल जाता है। उत्तराखंड राज्य के 20 साल के इतिहास में ऐसा अक्सर देखा गया। किसी मामले में शिक्षकों के दो पक्ष खड़ हो जाने से शिक्षक संगठन भी चुप्पी की मुद्रा में आ जाता है।

शिक्षा विभाग में तमाम ऐसी नियुक्ति, स्थायीकरण, वरिष्ठता, प्रमोशन के मामले में हैं जिनके खिलाफ शिक्षकों को एक स्वर में आवाज उठानी चाहिए थी। मगर, ऐसा नहीं हुआ। उल्टे शिक्षक ऐसे मामलों उलझते दिखे। इसने सरकारों की मनमानी की राह आसान कर दी।

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