देवप्रयाग। देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के लोग राजनीतिक दलों के साथ ही वर्तमान और पूर्व विधायक का लेखा जोखा तैयार कर चुकी है। तैयार लेखा जोखा 2027 के चुनाव में आम लोगों के लिए एक तरह से गाइड का काम करेगा।
राजनीतिक तौर पर देवप्रयाग क्षेत्र के मतदाता बेहद जागरूक माने जाते हैं। इसका देवप्रयाग को कई तरह से और कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है। कांग्रेस के परम कार्यकाल में देवप्रयाग से कभी निर्दलीय तो कभी कम्युनिस्ट भी चुनाव जीतते रहे। राज्य गठन के बाद हुए पांच विधानसभा चुनाव के रिजल्ट मिश्रित रहे। एक बार कांग्रेस, एक बार यूकेडी, एक बार निर्दलीय और दो बार भाजपा चुनाव जीती।
पिछले पांच विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो देवप्रयाग भाजपा का गढ़ नहीं रहा। पहले तीन चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। 2017 और 22 के विधानसभा चुुनाव में यहां कमल परिस्थितिजन्य तरीके से खिला। इस बात को अब देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के लोग खुलकर कहने लगे हैं।
2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में विजयी प्रत्याशी को मिले वोट और अन्य प्रत्याशियों को मिले वोट सारी तस्वीर स्पष्ट कर देते हैं। बहरहाल, पिछले नौ सालों में देवप्रयाग के लोगों ने राजनीति को ढंग से देखा और महसूस किया।
देवप्रयाग में भी और श्री बदरीनाथ में भी। पानी के लिए आवाज उठाने पर पानी के बजाए जयकारे भी लोगों ने सुनें। निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी लोगों ने बहुत कुछ देखा और महसूस भी किया। कांग्रेस की सरकार और भाजपा की सरकार के समय हुए कार्यों और विधायकों को सुलभता की लोग अब तुलना करने लगे हैं।
कुल मिलाकर देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने राजनीतिक दलों और पूर्व और वर्तमान माननीयों का लेखा जोखा तैयार कर चुके हैं। इसके मुताबिक सवाल भी होने लगे हैं। आने वाले दिनों में तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।