कोविड-19ः उत्तराखंड को दिल्ली मॉडल की दरकार

कोविड-19ः उत्तराखंड को दिल्ली मॉडल की दरकार

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देहरादून। कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण और इसमें जन सहयोग पाने के लिए जरूरी है कि राज्य में दिल्ली मॉडल लागू किया जाए।

दिल्ली में कोरोना संक्रमण का रिकवरी रेट करीब 90 प्रतिशत है। ये नेशनल रिकवरी रेट से अधिक है। इसकी बड़ी वजह दिल्ली सरकार की सटीक स्ट्रेटजी है। दिल्ली में कोरोना संक्रमण के माइल्ड केस का उपचार घर पर ही किया जा रहा है।

इस व्यवस्था के शुरू होते ही दिल्ली में कोरोना संक्रमण से रिकवरी रेट एका-एक बढ़ गया। अब दिल्ली कोरोना संक्रमण के मामले में संतोषजनक स्थिति में है। कहा जा सकता है कि दिल्ली ने कारोना को मात दे दी है।

उत्तराखंड को भी दिल्ली मॉडल की दरकार है। राज्य में हर दिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों ने दहशत है। कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी सौ के पार पहुंच गया है। राज्य में अधिकांश कोरोना संक्रमण के मामले माइल्ड हैं। यानि घर पर उपचार की सुविधा देकर हॉस्पिटल में भर्ती होने के मानसिक दबाव से लोगों को बचाया जा सकता है।

ये बात देखी जा रही है कि हॉस्पिटल एडमिट होने पर मरीज दबाव महसूस कर रहा है। इससे कहीं न कहीं इम्युनिटी प्रभावित हो रही है। साथ ही परिजन तनाव झेलने को मजबूर हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर समाज में बने डर से ये एक तरह से सोशल स्टिगमा बन गया है।

लोगों को इस पैनिक से बचाने के लिए सरकार को दिल्ली मॉडल पर विचार करना चाहिए। कम से कम राज्य के बड़े शहर, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, हल्द्वानी, ऋषिकेश, कोटद्वार आदि में ऐसी व्यवस्था की जा सकती है।

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