कोरोना वॉरियरः विभागीय काम, घर और फिर वीरांगना रसोई

कोरोना वॉरियरः विभागीय काम, घर और फिर वीरांगना रसोई

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देहरादून। विभागीय काम, घर की जिम्मेदारी और फिर जरूरतमंदों के लिए वीरांगना रसोई की चिंता। ये है बाल विकास विभाग के पांच महिला समेत छह अधिकारियों का इन दिनों का रूटिन। ये वास्तव में कोरोना वॉरियर हैं।

जी हां, बात हो रही है बाल विकास विभाग की पांच महिला अधिकारी श्रीमती क्षमा बहुगुणा, अंजू बडोला, श्रीमती विमला कंडारी, श्रीमती अंजू डबराल, श्रीमती तरूणा चमोला और जिला बाल विकास परियोजना अधिकारी डा. अखिलेश मिश्र की।

बाल विकास विभाग के इन छह अधिकारियों पर वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में खास जिम्मेदारी हैं। इसमें बच्चों के साथ ही महिलाओं को जागरूक करना शामिल है। इस मोर्चे पर उक्त अधिकारी रात-दिन लगे हुए हैं।

इसके बाद घर-समाज की जिम्मेदारी अलग से है। इन सबके बाद उक्त अधिकारियों ने लॉकडाउन में जरूरतमंद लोगों के लिए वीरांगना रसोई शुरू की है। 18 अप्रैल को शुरू हुई रसोई हर दिन प्रशासन के माध्यम से करीब पांच सौ लोगों को भोजन मुहैया करा रही है।

चेहरे पर बगैर किसी सिकन के उक्त कोरोना वारियर का जज्बा देखते ही बनता है। कभी भी फोन करने पर उत्साह और कुछ करने का जज्बा साफ महसूस होता है। वीरांगना रसोई का काम निपटाने के बाद सभी महिला अधिकारी अपने आस-पास की जानकारी जरूर जुटाती हैं। ताकि जहां जरूरत हो वहां मास्क, नैपकिन, वैष्णवी किट मुहैया कराई जा सकें।

डयूटी जाते वक्त खेल खलिहानों में बगैर मास्क के कोई काम करते दिखे तो बाल विकास विभाग के अधिकारी तत्काल मास्क देने पहुंच जाते हैं। लोगों को कोरोना महामारी के बारे में समझाते हैं और बचाव के बारे में बताते हैं। इन धरातलीय कोरोना वॉरियर को सलाम।

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