क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट को व्यवहारिक बनाने की तैयारी

क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट को व्यवहारिक बनाने की तैयारी

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देहरादून। क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट को राज्य की परिस्थितियों के मुताबिक तैयार करने पर अब शासन भी सहमत दिख रहा है।

उल्लेखनीय है कि क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट की खामियों की वजह से देश में अभी तक चार राज्यों में ही इसे लागू किया जा सका है। उक्त राज्यों ने इसमें अपनी परिस्थितियों के मुताबिक संशोधन के साथ लागू किया।

उत्तराखंड में आईएमए के बैनर तले डाक्टर इसका विरोध कर रहे हैं। आईएमए को क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति है। साथ ही डॉक्टर इससे इलाज के महंगा होने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।

बहरहाल, आईएमए के विरोध पर पहली बार सरकार ने गौर किया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आईएमए द्वारा बताई गई एक्ट की खामियों की समीक्षा की तैयारी है। इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि एक्ट को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक बनाया जाए।

साथ ही एक्ट में राज्य में चिकित्सा/स्वास्थ्य सुविधाओं के मौजूदा और इसकी व्यवहारिकता पर भी फोकस किया जाएगा। हालांकि अभी शासन के स्तर से अभी इस पर कोई अधिकृत टिप्पणी नहीं हुई है।

 

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