उत्तराखंड के चारधामः कमाई के नजरिए से देखना ठीक नहीं

उत्तराखंड के चारधामः कमाई के नजरिए से देखना ठीक नहीं

देहरादून। आदिधाम श्री बदरीनाथ समेत उत्तराखंड के चार धामों को कमाई के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। देवस्थानम एक्ट को इसकी कमाई बढ़ाने के लिए लागू करने की बात तो और भी गलत है।

ये बात सच है कि भारत में तमाम ऐसे मंदिर हैं जिनकी आमदनी इतनी है कि वो संबंधित क्षेत्र की बेहतरी में सरकार की मदद कर रहे हैं। इन मंदिरों की किसी भी स्तर पर आदिधाम श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री से तुलना नहीं हो सकती।

भू-बैकुंठधाम श्री बदरीनाथ को कमाई से जोड़ना तो पाप के समान है। ये बात भी समझनी होगी कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से चारधाम यात्रा साल में बमुश्किल 60-70 दिन ही चलती है। ऑल वेदर रोड बने या कुछ और प्रकृति के मिजाज को नहीं बदला जा सकता।

ऐसे में इन मंदिरों में होने वाले चढ़ावे/दान की तुलना कैसे साल भर खुले रहने वाले मंदिरों से की जा सकती है। चारधाम यात्रा राज्य की लाइफ लाइन है। ये लाइफ लाइन आधारिक सुविधाएं जुटाकर मजबूत की जा सकती है। चारधाम यात्रा पड़ावों पर अच्छी पार्किंग हो, ठहरने की अच्छी व्यवस्था और अन्य आधारिक सुविधाएं ठीक हों। इस पर सरकार को काम करना चाहिए।

इसके लिए देवस्थानाम एक्ट की जरूरत समझ से परे है। सवाल उठता है कि यात्रा पड़ावों की व्यवस्था सुधारने से पहले सरकार को सीधे मंदिरों तक पहुंचने की क्या सूझी।

हैरानगी इस बात की है कि जिम्मेदार लोग कह रहे हैं कि देवस्थानम एक्ट को कमाई बढ़ाने के लिए लागू किया गया। दावा ये भी कि 10 सालों में सबको परिवर्तन दिखेगा।

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