चम्पावत में बौद्धिक आत्मनिर्भरता पर प्रबुंद्ध संगोष्ठी

चम्पावत में बौद्धिक आत्मनिर्भरता पर प्रबुंद्ध संगोष्ठी
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पश्चिम के आंधानुकरण से बचने की जरूरतःडा. शुक्ल

तीर्थ चेतना न्यूज

चम्पावत। बौद्धिक आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है कि पश्चिम के अंधानुकरण से बचा जाए। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों पर भरोसा करना सीखना होगा।

ये कहना है कि हिन्दी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० रवीन्द्र शुक्ल का। डा. शुक्ल हिन्दी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय), जनपद चम्पावत के तत्वावधान में राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज चम्पावत के सभागार में ’बौद्धिक आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भर भारत हेतु आधारभूत आवश्यकता’ विषय पर प्रबुद्ध संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

डॉ० रवीन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा अत्यन्त समृद्ध रही है, इसलिए हमें पाश्चात्य संस्कृति की ओर भागने की आवश्यकता नहीं है। डॉ० शुक्ल ने कहा कि हमें अपनी युवा पीढ़ी को अपने संस्कृति और संस्कारों पर गर्व करना सिखाना होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य भारती हिन्दी भाषा के सम्मान, साहित्यिक प्रदूषण दूर करने और माँ भारती की विश्व मे प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है।

अति विशिष्ट अतिथि गन्ना मन्त्री उत्तराखण्ड सरकार सौरभ बहुगुणा ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक दर्जा दिलाये जाने के लिए हिन्दी साहित्य भारती के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा कि भारत पुनः विश्व-गुरु बनने की ओर अग्रसर है।

विशिष्ट अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के केन्द्रीय उपाध्यक्ष एवं ओ०एन०जी०सी०, देहरादून के पूर्व महाप्रबंधक डॉ० बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि सैंकड़ो साल पहले अन्य देशों में मजदूरी के लिए जाने वाले अनपढ़ मजदूरों ने आज तक भारतीय संस्कारों और परम्पराओं को जीवित रखा है, जबकि पढ़े-लिखे युवा अन्य देशों में जाकर भारत और भारतीयता को भूल रहे हैं। डॉ० मिश्र ने कहा कि हमें आज की आधुनिक शिक्षा तो सीखनी है, लेकिन संस्कारों की कीमत पर नहीं।

निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी डॉ० शाश्वतानन्द गिरी जी महाराज ने कहा कि स्वाधीन भारत में भी हम मानसिक रूप से गुलाम बने हुए हैं। भारत हमेशा साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, गणित, खगोल शास्त्र आदि सभी क्षेत्रों में अग्रणी रहा है और हमने पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है। इसलिए हमें बौद्धिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है ताकि भारत पुनः विश्व गुरु बन सके।

संगोष्ठी की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य भारती, उत्तराखण्ड की प्रदेश अध्यक्ष डॉ० कविता भट्ट “ शैलपुत्री“ ने ं कहा कि उत्तराखण्ड के समस्त 13 जनपदों में संगठन सक्रिय है। चम्पावत जैसे सुदूर और छोटे जिले में प्रबुद्ध संगोष्ठी का सफल आयोजन संगठन की सक्रियता का प्रमाण है। डॉ० भट्ट ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को अपनी ज्ञान-परम्परा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय महामन्त्री डॉ० अनिल शर्मा ने मंचासीन अतिथियों का भावाभिनन्दन करते हुए हिन्दी साहित्य भारती का परिचय, लक्ष्य-उद्देश्य और संगोष्ठी के विषय पर बीज व्यक्तव्य प्रस्तुत किया। संचालन प्रदेश संयुक्त महामन्त्री श्रीमती मीनू जोशी ने किया।

इस अवसर पर गौरांग रघु जी महाराज, रानीखेत के विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री पुष्कर सिंह काला, भाजपा नगर अध्यक्ष चम्पावत कैलाश अधिकारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० कीर्ति बल्लभ सकटा, उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री जगमोहन सिंह रावत, जिलाध्यक्ष चम्पावत श्रीमती दीपा पाण्डेय, प्रदेश मंत्री जगदीश पन्त “कुमुद“, प्रदेश मीडिया प्रभारी ठाकुर मोहित सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम संयोजक जितेंद्र राय “जीत“ ने सभी मंचासीन अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संजय भारद्वाज, डॉ० सुमन पाण्डेय, कमला वेदी, भूपेन्द्र ताऊजी, नीरजा गहतोड़ी, रूद्र सिंह बोहरा, नवीन भट्ट, मीना परगाई, राजेन्द्र गहतोड़ी, पान सिंह मेहता, अनिल कुमार, सोनू बाथम तथा ए बी वी पी के राहुल जोशी, विनोद बगौती, कुशाग्र आदि अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

Tirth Chetna

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