धामी कैबिनेट ने 11 प्रस्तावों पर लगाई मुहर
तीर्थ चेतना न्यूज
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इसमंे प्रोक्योरमैंट नियमावली में संशोधन कर 10 करोड़ तक के कार्य स्थानीय संस्थाओं/ व्यक्तियों को देने की व्यवस्था प्रमुख रूप से शामिल है।
बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में वित्त विभाग, उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना दिनांक 14 जुलाई, 2017 के द्वारा राज्य में अवस्थापना एवं सेवा परियोजनाओं के लिए सामग्री, निर्माण कार्य, सेवाओं की अधिप्राप्ति और लोक निजी सहभागिता की व्यवस्था करने के प्रयोजन और उनसे सम्बन्धित या अनुषांगिक विषयों के विनियमन के लिए उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियमावली, 2017 प्रख्यापित की गई है।
कैबिनेट के द्वारा उत्तराखंड अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमेंट) नियमावली में संशोधन का अनुमोदन करते हुए राज्य के स्थानीय निवासियों के सशक्तिकरण और उनके रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए विभिन्न विभागों में रू. 10 करोड़ तक की लागत के कार्य स्थानीय व्यक्तियों या स्थानीय पंजीकृत फर्मों के माध्यम से ही कराए जाने का निर्णय लिया गया है। अभी तक स्थानीय लोगों के लिए यह सीमा रू. 05 करोड़ तक थी। इसके साथ ही राज्य के विभागों में विभिन्न श्रेणियों में पंजीकृत ठेकेदारों के लिए कार्य की सीमा को भी बढाने का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट के द्वारा स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय उत्पादों को बढावा देने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों एवं एवं एमएसएमई को क्रय वरीयता प्रदान करने के लिए भी नीति का अनुमोदन प्रदान किया गया है। स्वयं सहायता समूहों के लिए पहले इस तरह की कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी। अभी तक स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों को रू. 05 लाख तक की लागत के कार्य दिए जा सकते थे। क्रय वरीयता की नीति लागू होने से राज्य के सरकारी विभागों की निविदा प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को न्यूनतम दर की निविदा से 10 प्रतिशत की सीमा तक क्रय वरीयता मिलेगी। निविदा प्रक्रिया में अर्नेस्ट मनी को भौतिक रूप में जमा किये जाने की व्यवस्था को समाप्त कर अब निविदाओं के साथ ऑनलाईन प्रक्रिया से ई.बी.जी. (इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी) लिए जाने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट के द्वारा प्रोक्योरमेंटी में संबंध में शिकायतों के निस्तारण के लिए आईएफएमएस पोर्टल पर ग्रीवांस रिड्रेसल यूटिलिटी को भी संचाालित किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
उत्तराखण्ड मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति-2025 (मेगा पॉलिसी-2025) के प्राख्यापन के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
उत्तराखण्ड विष (कब्जा और विक्रय) नियमावली, 2023 की अनुसूची में संशोधन किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली, 2019 के राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित सेवा नियमावली, 2019 के लागू होने से पूर्व कोषागार विभाग में कार्यरत सहायक लेखाकारों / लेखाकारों के सम्बन्ध में विद्यमान वेतन विसंगति का निराकरण किये जाने के संबंध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
राज्य बांध सुरक्षा संगठन, उत्तराखण्ड द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को मा० विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किये जाने के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय।बांध की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख-रखाव प्रदान करने हेतु भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्राविधानों के आलोक में उत्तराखण्ड में गठित राज्य बांध सुरक्षा संगठन के द्वारा उनके अधिकार क्षेत्र में निर्मित 21 बाधों की सुरक्षा स्थिति के सम्बन्ध में बांध सुरक्षा संगठन, उत्तराखण्ड द्वारा तैयार वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को मा० विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किये जाने हेतु मा० मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।
राज्य में उत्तराखण्ड निबन्धन लिपिक वर्गीय कर्मचारी सेवा नियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में निर्णय उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति 2024 में किये गये कतिपय संशोधनों को कैबिनेट द्वारा दी गई मंजूरी। उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड के ढाँचें में 11 अतिरिक्त पद सृजित किये जाने के सम्बन्ध में लिया गया निर्णय। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में चाय विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए चाय विकास उत्पादन के समुचित विकास, वित्तीय व्यवस्था, निवेश एवं सयंत्र आदि की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु वर्ष 2004 में उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड का गठन करते हुए बोर्ड का मुख्यालय जनपद अल्मोड़ा में स्थापित किया गया था।
वर्तमान में बोर्ड द्वारा पुराने चाय बागानों का जीर्णाेद्वार, नये चाय बागानों की स्थापना, नये क्षेत्रों में चाय की खेती की सम्भावनाओं का सर्वेक्षण, निष्प्रोज्य पड़ी भूमि में चाय प्लान्टेशन कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा कृषकों की आय में वृद्धि करने एवं काश्तकारों से लीज पर ली गई भूमि में चाय बागान विकसित किये जाने के दृष्टिगत विभागीय कार्यहित में 11 अतिरिक्त पद (04 नियमित एवं 07 आउटसोर्स) सृजित किये जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।
उत्तराखंड योग नीति 2025 को मिली कैबिनेट की मंजूरी। उत्तराखंड को भारत की अध्यात्मिक और योग परंपरा की भूमि माना जाता है, जो सदियों से ऋषियों, मुनियों और साधकों की साधना स्थली रही है। आज भी ऋषिकेश, कौसानी, चम्पावत जैसे स्थल कई दशकों से योग साधना के प्रमुख केन्द्र है। इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजते हुए उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 में एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत उत्तराखंड योग नीति 2025 की घोषणा की है। यह देश की प्रथम योग नीति है जो राज्य को योग और वेलनेस की वैशिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। जिसे राज्य कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है।
इसके अतिरिक्त, योग संस्थानों का शत प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, एक विशेष ऑनलाइन योग प्लेटफार्म शुरू किया जाएगा, योग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचार अभियान और अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा तथा मार्च 2028 तक 15 से 20 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भागीदारी विकसित करने का लक्ष्य है।
राज्य में पहले से चल रहे होमस्टे, रिसॉर्ट, होटल, स्कूल, कॉलेज आदि में यदि योग केंद्र स्थापित किए जाते है तो नियोजित होने वाले योग अनुदेशक हेतु प्रत्ति सत्र ₹250 तक की प्रतिपूर्ति उक्त संस्था को दी जाएगी, प्रति केंद्र में एक अनुदेशक हेतु प्रति माह 20 सत्रों की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज देहरादून व हल्द्वानी के समीप रोगियों के तीमारदारों के लिये विश्रामगृहों की स्थापना का निर्णय।
राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रदान की जानी वाली द्वितीयक एवम् तृतीयक श्रेणी की चिकित्सा सेवा/सुविधा में आई०पी०डी० रोगियों के साथ तीमारदार भी आवश्यक रूप से प्रवास करते हैं, की संख्या भी लगभग रोगियों / मरीजों के बराबर ही रहती है। उक्त तीमारदारों के विश्राम हेतु चिकित्सालय के समीप ही विश्राम गृह की व्यवस्था न होने के कारण रोगियों के परिजन चिकित्सालय की गैलरी, वार्ड के बाहर अथवा चिकित्सालय परिसर के आस पास ही ठहरते / रात्रि विश्राम करते हैं, जिससे चिकित्सालयों में कार्यरत् स्टाफ को मरीजों के चिकित्सकीय परीक्षण एवं देखभाल में असुविधा होती है साथ ही रोगियों के परिजन भी परेशान होते हैं। अतः उक्त चिकित्सालयों के समीप रोगी के तीमारदारों के स्वास्थ्य एवम् सुरक्षा की दृष्टि से मूलभूत सुविधाओं वाले साफ-सुथरे, सुरक्षित विश्राम गृह होना अत्यन्त आवश्यक है। राज्य के सीमित संसाधनों के दृष्टिगत राजकीय मेडिकल कॉलेज, देहरादून एवं हल्द्वानी के सम्बद्ध चिकित्सालयों में सुदूरवर्ती पर्वतीय / मैदानी क्षेत्रों से आने वाले रोगियों के तीमरदारों की सुविधा हेतु चिकित्सालयों के समीप विश्राम गृह की स्थापना एवं संचालन इच्छुक गैर लाभकारी संस्था/सी०एस०आर० मद / बाह्य सहायतित योजनाओं के माध्यम से किये जाने का कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया।
प्रदेश में संचालित अटल आयुष्मान योजना और राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में लंबित देनदारियों की प्रतिपूर्ति हेतु 75 करोड़ रुपए स्वास्थ विभाग को लोन के रूप में किया आवंटन।


