ऋषिकेश। भारतीय जनता पार्टी के देवतुल्य कार्यकर्ताओं पर पार्टी के विजिबल/ इनविजिबल पॉलिटिकल कंपल्शन भारी पड़ रहे हैं। परिणाम आगे बढ़ने के उनके मौके लगातार कम हो रहे हैं। ये क्रम आगे भी बना रहने वाला है। इनविजिबल पॉलिटिकल कंपल्शन लगातार जो बढ़ रहे हैं।
कार्यकर्ताओं की संख्या के लिहाज से भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। इस पर पार्टी के देवतुल्य कार्यकर्ता खूब इतराते हैं। ये उनका अधिकार भी है। पार्टी के बड़े बनने के चक्कर में उसके वास्तविक देवतुल्य कार्यकर्ताओं के हित प्रभावित हो रहे हैं।
हित प्रभावित होने का अंत दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है। क्षेत्र में लोगों के बीच अच्छी पकड़ बनाने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल खाने कब कोई दूसरी पार्टी से आ जाए कहा नहीं जा सकता। कारण हर बार पार्टी के पॉलिटिकल कंपल्शन कई नए रूपों में सामने आ जाते हैं। कम से कम हर स्तर के चुनाव में ये देखा जा सकता है।
विजिबल पॉलिटिकल कंपल्शन से अधिक अब इनविजिबल कंपल्शन अधिक हो गए हैं। इनविजिबल कंपल्शन की आड़ में पार्टी के देवतुल्य कार्यकर्ता ठिकाने लग रहे हैं। कई क्षेत्रों में इसे देखा और महसूस किया जा सकता है। कई वरिष्ठ कार्यकर्ता तो स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। एक-एक नेता के पांच-पांच बार विधायक बनने से उस आयु वर्ग देवतुल्य कार्यकर्ताओं का पॉलिटिकल कैरियर लगभग समाप्त ही हो गया।
सरकार में दायित्व के मामले में भी ऐसा ही कुछ दिखा। कई चेहरे इनविजिबल कंपल्शन के नाम पर कुर्सी पा गए जिनके नाम को लेकर देवतुल्य कार्यकर्ता हैरान हैं। मंडल अध्यक्ष पद पर एज बार लगा दिया। कई कार्यकर्ता दौड से बाहर हो गए।
निकाय चुनाव में चार-पांच बार के विधायकों को एक बार का मेयर और पालिकाध्यक्ष नहीं भाए। ठिकाने लगा दिए गए। कुछ को दायित्व देकर पुचकारा गया तो कुछ की उपेक्षा अभी भी जारी है। दरअसल, ये सब पॉलिटिकल कंपल्शन के नाम पर देवतुल्य कार्यकर्ताओं के साथ खेला हो रहा है।