समस्त जीवों के अस्तित्व को जैव विविधता आवश्यक

समस्त जीवों के अस्तित्व को जैव विविधता आवश्यक
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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विशेष

प्रो. गोविंद सिंह रजवार

समस्त जीवों के सह अस्तित्व के लिए जैव विविधता कितनी आवश्यक है यह इस बात से ज्ञात होता है कि मानव ने जैव विविधता का इस सीमा तक दोहन कर दिया कि प्रकृति की व्यवस्थाएं ही बदल गई। ये बदलाव अस्तित्व पर आए संकट का अलार्म है।

ये स्थिति मानव जाति ही नहीं बल्कि संपूर्ण जीव जगत के सहसंबंध को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है। जैव विविधत न केवल एक प्राकृतिक संसाधन है बल्कि पृथ्वी के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। ये अलौकिक सौंदर्य भी प्रदान करती है। यही नहीं ये सभी धर्मों एवं मानव सभ्यताओं के लिए आध्यात्मिक संबंध भी स्थापित करती है।

सौर ऊर्जा को पृथ्वी पर उपस्थित अधिकतर जैव विविधता अंश- हरित पादप/शैवाल रासायनिक ऊर्जा प्रदान कर जीवन का अस्तित्व बनाते हैं। पृथ्वी के किसी भी क्षेत्र में संरक्षित जैव विविधता मानव के मन को एक अलौकिक अहसास प्रदान करती है, जिससे स्थानीय समुदायों ने जैव विविधता को बचाने हेतु प्रयास किए हैं। यह प्रयास मानव का जैव विविधता के प्रति अटूट संबंध को प्रदर्शित करता है, जिसमें इनसे प्राप्त होने वाले लाभ भी शामिल होते हैं।

इस प्रकार के संबंधों को प्रदर्शित करने के उदाहरण हैं जैव विविधत युक्त हिंदुओं के पवित्र स्थल, हिमालय का चिपको आंदोलन, अफ्रीका के काया जंगलों में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, इस्लाम धर्म के अनुसार स्थापित हिमास संरक्षित क्षेत्र, अमेरिका के सू इंडियन जनजाति द्वारा प्रकृति के अवयवों को संरक्षक के रूप में शक्ति प्रदान करना, चीन की ताओ पद्वति एवं सभी धर्मों के अनुसार मानव जीवन तथा जैव विविधता के मध्य आध्यात्मिक संबंध।

संयुक्त राष्ट्र की द्वितीय समिति द्वारा सन 1993 में कान्वेसन ऑफ बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी के स्थापना दिवस 29 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधत दिवस के रूप में चयनित किया गया। सन 2000 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा इस दिवस को 22 मई को मनाने का निर्णय किया गया।

2022 हेतु अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के लिए समस्त जीवों के लिए एक साझा भविष्य का निर्माण विषय चयनित किया गया है। यह विषय संकेत करता है कि समस्त जीवों का भविष्य साझे तौर पर स्थापित रहे। जिससे सब जीव सहसंबंध स्थापित कर भविष्य को सुरक्षित बना सकें। विभिन्न दीर्घजीवी विकास चुनौतियों जैसे जलवायु हेतु प्रकृति आधारित समाधान, स्वास्थ्य समस्याएं, खाद्य एवं जल सुरक्षा एवं दीर्घजीवी आजीविका की एक मात्र कुंजी है।

जैव विविधिता, समृद्ध पृथ्वी के निर्माण आधारशिला जैव विविधता ही है। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता आयोजनों में मुख्य रूप से जागरूकता अभियान एवं जैव विविधता हेतु किए जाने वाले कार्य प्रमुख हैं। जैव विविधता में तीन मुख्य प्रकार की विविधताएं होती हैं। जीन स्तर पर पाए जाने वाली भिन्नता, विभिन्न प्रकार की प्रजातियां एवं विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र।

जैव विविधता कई प्रकार से मानव के लिए उपयोगी है। जैसे व्यावसायिक उपयोगिता (खाद्य, औषधि, ईधन, कारखानों हेतु कच्चा माल), सामाजिक उपयोगिता (रीति रिवाज, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्य), नैतिक मूल्य (सभी जीवों को जीने का अधिकार), सौंदर्य उपयोगिता (इकोटूरिज्म), पारिस्थितिक सेवाएं (जल, ऑक्सीजन) प्रकृति का स्वयं रखरखाव, मृदा क्षरण एवं बाढ़ रोकना, पदार्थों का चक्र, कार्बन अवशोषण आदि।

जैव विविधता संसाधनों के दोहन के कारण विश्व के कई देशों एवं क्षेत्रों में संघर्ष होते रहते हैं। इन पर अधिकार के कारण पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के मध्य भी आर्थिक कारणों से संघर्ष होता रहता है। भारत की जैव विविधता में 48000 से अधिक वनस्पति प्रजातियों तथा 77000 से अधिक जंतु प्रजातियां सम्मिलित हैं। जिनमें 5200 पेड़ पौधे एवं 1900 जंतुओं की प्रजाति स्थानिक हैं।

जैव विविधता में समस्या उत्पन होना मानव जाति की समस्या का एक प्रमुख कारण है। सभी प्रजातियों के अस्तित्व एवं सहसंबंध को समझना आवश्यक है तभी हम इनके विनाश के कारणों (वन विनाश, अत्यधिक चरान, विकास कार्यों हेतु वनों एवं चारागाहों का विनाश, जल विद्युत परियोजना, प्रदूषण, खनन, जंगली जानवरों का अवैध शिकार, अनियंत्रित पर्यटन एवं पर्वातारोहण, ग्रीन हाउस प्रभाव, विदेशी अक्रामक पादप प्रजातियों द्वारा देशी प्रजातियों का प्रतिस्थापन आदि) का वैज्ञानिक एवं मानवीय तरीकों से निवारण कर सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण ये है कि सामान्य नागरिक अवधारणा जिसका अर्थ है पड़ोसियों नियोजकों एवं पर्यावरण वैज्ञानिकों का प्रकृति एवं समाज के उत्थान हेतु एक साथ मिलकर कार्य करना, जिससे पृथ्वी की जैवविविधता बचायी जा सकें तथा मानव तथा अन्य सभी जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधों के लिए एक साझा भविष्य का निर्माण किया जा सकें।

लेखक फैलो, लीनियन सोसाइटी ऑफ लंदन एवं वनस्पति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर हैं।

Tirth Chetna

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