उत्तराखंड की बसंती बिष्ट को पदमश्री

उत्तराखंड की बसंती बिष्ट को पदमश्री

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देव स्तुतिगान जागर गायन में पुरूषों के एकाधिकार को चुनौती देकर आगे बढ़ी बसंती बिष्ट को पदमश्री के लिए चुना गया है।

देश में पहली बार पदम पुरस्कार पक्षपात और जोड़तोड़ से परे दिख रहे हैं। ऑन लाइन नामांकन प्रक्रिया के बाद चुने गए लोगों में 89 को पदम पुरस्कार के लिए चुना गया। इसमें दर्जन भर से अधिक गुमनाम चेहरे हैं।

इस कड़ी में उत्तराखंड की जागर गायिका बसंती बिष्ट भी शामिल है। कभी जागर गायकी में पुरूषों का एकाधिकार हुआ करता था। बसंती ने इस एकाधिकार को तोड़कर अपनी राह बनाई। चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के ल्वाणी गांव निवासी 65 वर्षीय बसंती बिष्ट ने अपनी मां से जागर गाना सीखा।

पति ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और सेना में जालंधर में तैनाती की दौरान उन्हें शास़्त्री संगीत की शिक्षा दिलाई। यहां से मिली राह के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं दिखा। देश और प्रदेश में तमाम सम्मानों से नवाजी जा चुकी बसंती को भारत सरकार ने पदश्री से नवाजने का निर्णय लिया है।

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