शिक्षकों के वेतन पर संकट बरकरार

शिक्षकों के वेतन पर संकट बरकरार

teacher-salaryशिक्षकों के विभिन्न संगठनों के आंदोलन, हड़ताल के बावजूद प्लान, एसएसए और रमसा के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के वेतन का संकट बना हुआ है।

प्लान, सर्वशिक्षा अभियान और राष्टीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के स्कूलों में तैनात प्रदेश के हजारों शिक्षकों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा है। तीन-चार माह का विलंब होना आम बात हो गई है। परिणाम शिक्षकों का बजट गड़बड़ा रहा है।

विभिन्न शिक्षक संगठनों के आंदोलन, हड़ताल और सरकार के साथ वार्ता के बाद भी शिक्षक नेता इस मामले में ठोस आश्वासन नहीं ले सकें। सरकार के आश्वासन और शासनादेश को अपनी उपलब्धि करार दे रहे शिक्षक नेता समय से वेतन की बात पर चुप्प हैं।

पांच-छह माह तक वेतन न मिलने से शिक्षक कैसे पूरे मनोयोग से पढ़ा पा रहा होगा समझा जा सकता है। विभागीय अधिकारियों का इस मामले में रवैया और हैरान करने वाला होता है। शासन में बैठे आलाधिकारी भी इसका ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि आखिर वेतन में इतना विलंब क्यों हो रहा है।

उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो कार्मिक को समय से वेतन न मिलना शासन में बैठे अधिकारियों की क्षमताओं पर सवाल खड़े करता है। केंद्रांश का उपलब्ध न होना या फिर अन्य तकनीकी बातों का कार्मिक से कोई लेना देना नहीं है।

सीधा सा सवाल है कि क्या शासन में बैठा कोई अधिकारी पांच-छह माह तक बिना वेतन के काम कर सकता है। बहरहाल, हालात ये हो गए हैं कि अब शिक्षकों के परिवार भी इस मामले में सरकार का तकाजा करने लगे हैं।

समय से वेतन न मिलने की तमाम शिकायतें आलाधिकारियों तक पहुंच रही हैं। चुनाव की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दलों के कारिंदे भी लोगों के बीच उक्त सवालों से दो-चार हो रहे हैं।

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