उक्रांद जुटा तीसरे मोर्चे की कवायद में

उक्रांद जुटा तीसरे मोर्चे की कवायद में

ukd-kashiराज्य में अभी तक हुए तीन चुनावों में संगठन और राजनीतिक ताकत के मोर्चे पर छिन्न भिन्न हुआ उत्तराखंड क्रांति दल अब तीसरे मोर्चे की कवायद में जुटा हुआ है।

राज्य की राजनीतिक पावर कांग्रेस और भाजपा में बंटकर रह गई है। राज्य आंदोलन में फ्रंट पर बैटिंग करने वाले उक्रांद के हिस्से तीन चुनावों में निराशा ही आई। संगठन पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो गया। 2007 में उक्रांद भाजपा सरकार का निवाला बना तो 2012 में कांग्रेस का।

दल पर सत्ता दोष इतनी जल्दी लगा कि उसके कुछ चेहरे ही दल से अलग हो गए। परिणाम उक्रांद की राजनीतिक ताकत का ग्राफ तीजी से नीचे गिरा। 2002 के चुनाव में चार सीट, 2007 में तीन सीट और 2012 में एक सीट ही उक्रांद को मिल सकी। दल के नेता माने या न माने अब उक्रांद के सामने वजूद का संकट पैदा हो गया है।

बहरहाल, 2017 की तैयारियों में जुटे उक्रांद के दो धड़ों ने कुछ सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान भी कर दिया है। इसके साथ ही काशी सिंह ऐरी वाले धड़े ने तीसरे मोर्चे की कवायद शुरू कर दी है। गरज ये है कि सभी ताकतों को एक जुटकर वोट प्रतिशत बढ़ाया जाए। साथ ही ज्यादा न सही 2002 वाली स्थिति में तो लौटा जाए।

हालांकि दल के लिए ये प्रयोग से अधिक कुछ साबित होने वाला नहीं है। कारण जिन संगठनों पर दल की नजर है वो अभी प्रदेश में व्यापकता नहीं पा सके हैं। कमोबेस वामदलों की भी राज्य में यही स्थिति है। साथ ही उक्त संगठन अब जनता के सामने राजनीति दल के दौर पर कभी नहीं गए।

ऐसे में 2017 के चुनाव में उक्त संगठन उक्रांद को कैसे लाभ पहुंचाएंगे ये देखने वाली बात होगी।

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